असल में अंधभक्त कौन कांग्रेस समर्थक या भाजपा समर्थक :-
राजनीति में केवल दो राष्ट्रीय पार्टियाँ ही एक दूसरे का विरोध नहीं करतीं बल्कि उनके समर्थक भी आपस मे एक दूसरों को अंधभक्त और चमचा कहते हैं।
अगर कोई भाजपा को सपोर्ट करता है तो उसे विपक्ष वाले भक्त कहते हैं। और यदि कोई कांग्रेस को समर्थन करता है तो उसे विपक्ष वाले चमचा कहते हैं। आज हम कुछ तर्कों के आधार पर यह जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर में अंधभक्त कौन है? भाजपा समर्थक या कांग्रेस समर्थक :---
अगर कोई भाजपा को सपोर्ट करता है तो उसे विपक्ष वाले भक्त कहते हैं। और यदि कोई कांग्रेस को समर्थन करता है तो उसे विपक्ष वाले चमचा कहते हैं। आज हम कुछ तर्कों के आधार पर यह जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर में अंधभक्त कौन है? भाजपा समर्थक या कांग्रेस समर्थक :---
1. एक परिवार की भक्ति :-
कांग्रेस एक परिवार की पार्टी है जिसमे उन्हें आगे नहीं बढ़ाया जाता जो कांग्रेस में बड़े और अच्छे नेता हैं बल्कि उन्हें आगे बढ़ाया जाता है जो परिवार के वंश हैं, जैसे कि सोनिया गांधी के बाद राहुल गांधी का कांग्रेस अध्यक्ष बनना, और अगर कोई इसके बारे में बोले तो उसे पार्टी से निकाल दिया जाता है। तो क्या ये एक परिवार की भक्ति नहीं हुई , जबकि भाजपा में कोई तय नहीं है कि अमित शाह के बाद कौन अध्यक्ष बनेगा। कांग्रेस में तय है कि प्रधानमंत्री अगर कोई बनेगा तो राहुल गांधी, भाजपा में मोदी के बाद कौन प्रधानमंत्री बनेगा किसी को पता नहीं, तो क्या यह एक परिवार के प्रति भक्ति नहीं। तो अंधभक्त कौन हुआ?
2. 60 साल से आजतक अच्छे दिन की तलाश करना:-
देश मे 60 वर्षो से ज्यादा कांग्रेस की सरकार रही लेकिन कांग्रेसी पूछते हैं कि मोदी सरकार में अच्छे दिन क्यों नहीं आये इसका मतलब वे ये अबतक मान रहें थे कि कांग्रेस के 60 सालों के शासन काल मे अच्छे दिन नहीं आये थे जो मोदी के 5 सालों में आने की उन्हें उम्मीद थी खैर जब 60 वर्षों तक कांग्रेस पार्टी को समर्थन देना और फिर भी कांग्रेस को वोट देना उसके बारे में बात करना अंधभक्ति नहीं तो और क्या है? ये कांग्रेस के वे भक्त हैं जो ये भूल चुके हैं कि वे कांग्रेस समर्थन में खुद अंधभक्त बने घूम रहे हैं और अपने जैसे दूसरों को भी भक्त समझ रहे हैं।
3. राहुल गांधी को झेलना :-
दुनिया में अगर कोई सबसे मुश्किल काम है तो वह है राहुल गांधी को झेलना , ये काम कांग्रेस से अंधभक्त बखूबी कर रहे हैं चाहे लोकसभा में आंख मारना हो , चाहे आलू से सोना निकालना हो, या राहुल की हर सभा मे राफेल की अलग - अलग कीमते बताना हो बहुत से कारण हैं जो कांग्रेसी अंधभक्त जानते हुए भी राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के प्रति अंधभक्ति नहीं छोड़ रहें हैं। और वे इतने बड़े भक्त हैं कि आलू से सोना निकालने का इंतजार कर रहें साथ ही साथ चांद पर राहुल गांधी से जमीन लेकर खेती करने की। कभी कभी तो कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता भी नहीं समझ पाते की ये क्या बोल दिया महानुभाव ने क्योंकि जवाब तो वही बेचारे देते हैं। इसके बाद भी कांग्रेसी अंधभक्तो के लिए उनका भगवान सही है।
4. 60 वर्षों में इतने घोटालों के बाद भी भक्त मजबूती के साथ खड़े हैं:-
भारत मे जितने बड़े से बड़े घोटाले हुए हैं ये कांग्रेसी अंधभक्त भी जानते हैं कि कांग्रेस के सरकार के समय हुआ है यहाँ तक कि राहुल गांधी , सोनिया गाधीं खुद घोटालों में जमानत पर बाहर हैं , एक हैं कांग्रेसी अंधभक्तो के जीजाजी जो पता नहीं किस जादू से कुछ ही वर्षों में खरबपति बन गए जांच उनपे भी जारी है, खैर ये सब जानते हुए भी किसी के तलवे चाटना भक्ति नहीं अंधभक्ति होती है। आज भी भक्त राहुल को प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं साथ ही साथ 8 से 10 और घोटाला देखना चाहते हैं।
5. भक्तों द्वारा अपने राजा को 48 साल में भी युवा समझना :-
कांग्रेस भक्त कहते हैं कि राहुल गांधी युवा हैं अरे भाई 48 साल के उम्र का व्यक्ति अगर युवा होता है तो तुम्हारे हिसाब से राहुल गांधी बुड्डा होते होते 200 साल का हो जाएगा ऐसी भक्ति का पर्दा आखों पर और दिमाग पर केवल और केवल अंधभक्तो पर ही पड़ सकता है।
6. देशद्रोह की बात करने वालों के साथ खड़ा होना :-
JNU में जब देशद्रोही नारे लग रहे थे तो भक्तों के युवा राजा उनके साथ खड़े हो गए और कहने लगे कि इनकी आवाज को दबाया जा रहा है। अब ये बतावो की उसे देखकर भी राहुल गांधी की गुड़गान करना भक्ति है कि अंधभक्ति। मोदी को आज से 20 साल पहले बहुत कम लोग जानते थे राहुल गाँधी तो जन्म लेते ही भक्तों के भगवान हो गए, इस हिसाब से मोदी को समर्थन करना समझदारी है और राहुल को समर्थन करना भक्ति नहीं अंधभक्ति है।
लिखने के तो बहुत से पॉइंट हैं बहुत से तर्क हैं पर कांग्रेसी भक्तों के लिए इतना काफी है। लेख अच्छा लगा हो तो ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि और लोग सच्चाई को जान सके हो सकता है कि कुछ कांग्रेसी अंधभक्तो की आँखे खुल जाए।
अन्य लेख :-

🤣🤣🤣 सबसे बड़ा अंडभक्त तो ये लेख लिखने वाला है। गाय गोबर मूत्र, रडार, सर्जरी, इन सब पर बकलोल करने वाले कौन कहलाते है। कोरोना को भी गौमुत्र हवन पुजा से सही करने वाले कौन हैं?
ReplyDeleteChacha ki jal gayi eeeeee
Deleteलेखक खुद भक्त है बेचारा
Deleteतू साहब को बचाने में लगा है,लेकिन तुम्हारी अंधभक्ति झलक रही है ।
DeleteDar asal asli andh Bhakt yehi insan hai jisne yeh itna bada lekh Likha andh bhakti par gobar ki aulaad......
ReplyDeleteIss suar ka pahela tark padha waise hi samajh aa gaya ye wahi gadha hai jise andhbhakt kahete hai.😂😂😂🤣
ReplyDeleteYe lekh likhne wala chutiya AK andhbhakt h Jo bjp supporter h
ReplyDeleteOr achchhe se janta h ki vo andbhkt h pr bechara...
Ye likha ye pm ki not shit pe tha ya pakke andbhakat hi are andbhakat tuje modi jike scam knha se dikhe ge tu andhbhakat nahi landbhakat hai notbandi, 2cr nokriya ,15lakh, midia ko kharida, rafel, juthkabaap, budbak,aise kaee sabd hai jo feku ko bolne kam hai baki sab samjdar andbhakat ko chhod kar desh me itni Mandi hai gdp-23 kishan atmahatya China ki sima me jabradasti 10 sir leke aunga chudiya pahenle knha gayi smriti Irani nachane wali ab konse Bill me Jake ghusi hai gadi media kabhi sach nahi batati because padhe likhe hai hi nahi India me agar padhe likhe log hai modi ji sahi kam kar rahe hai to me khud bjp join kar lunga challenge ek Shar hai godi media ke liye 🇮🇳
ReplyDeleteDesh me itni mandee na hoti
Ye media agar Randee na hoti
Andhbhakat ka baap ajaaz
Chuteya bjp ke piche apne blog
ReplyDeleteबहुत सही जानकारी
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