आप यहाँ से ब्लॉग के सभी लेख देखें

असल मे अंधभक्त कौन?

असल में अंधभक्त कौन कांग्रेस समर्थक या भाजपा समर्थक :-


राजनीति में केवल दो राष्ट्रीय पार्टियाँ ही एक दूसरे का विरोध नहीं करतीं बल्कि उनके समर्थक भी आपस मे एक दूसरों को अंधभक्त और चमचा कहते हैं।
अगर कोई भाजपा को सपोर्ट करता है तो उसे विपक्ष वाले भक्त कहते हैं। और यदि कोई कांग्रेस को समर्थन करता है तो उसे विपक्ष वाले चमचा कहते हैं। आज हम कुछ तर्कों के आधार पर यह जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर में अंधभक्त कौन है? भाजपा समर्थक या कांग्रेस समर्थक :---

Sach me andhbhakt kaun hai

1. एक परिवार की भक्ति :-


कांग्रेस एक परिवार की पार्टी है जिसमे उन्हें आगे नहीं बढ़ाया जाता जो कांग्रेस में बड़े और अच्छे नेता हैं बल्कि उन्हें आगे बढ़ाया जाता है जो परिवार के वंश हैं, जैसे कि सोनिया गांधी के बाद राहुल गांधी का कांग्रेस अध्यक्ष बनना, और अगर कोई इसके बारे में बोले तो उसे पार्टी से निकाल दिया जाता है। तो क्या ये एक परिवार की भक्ति नहीं हुई , जबकि भाजपा में कोई तय नहीं है कि अमित शाह के बाद कौन अध्यक्ष बनेगा। कांग्रेस में तय है कि प्रधानमंत्री अगर कोई बनेगा तो राहुल गांधी, भाजपा में मोदी के बाद कौन प्रधानमंत्री बनेगा किसी को पता नहीं, तो क्या यह एक परिवार के प्रति भक्ति नहीं। तो अंधभक्त कौन हुआ?

2. 60 साल से आजतक अच्छे दिन की तलाश करना:-


देश मे 60 वर्षो से ज्यादा कांग्रेस की सरकार रही लेकिन कांग्रेसी पूछते हैं कि मोदी सरकार में अच्छे दिन क्यों नहीं आये इसका मतलब वे ये अबतक मान रहें थे कि कांग्रेस के 60 सालों के शासन काल मे अच्छे दिन नहीं आये थे जो मोदी के 5 सालों में आने की उन्हें उम्मीद थी खैर जब 60 वर्षों तक कांग्रेस पार्टी को समर्थन देना और फिर भी कांग्रेस को वोट देना उसके बारे में बात करना अंधभक्ति नहीं तो और क्या है? ये कांग्रेस के वे भक्त हैं जो ये भूल चुके हैं कि वे कांग्रेस समर्थन में खुद अंधभक्त बने घूम रहे हैं और अपने जैसे दूसरों को भी भक्त समझ रहे हैं।

3. राहुल गांधी को झेलना :-

दुनिया में अगर कोई सबसे मुश्किल काम है तो वह है राहुल गांधी को झेलना , ये काम कांग्रेस से अंधभक्त बखूबी कर रहे हैं चाहे लोकसभा में आंख मारना हो , चाहे आलू से सोना निकालना हो, या राहुल की हर सभा मे राफेल की अलग - अलग कीमते बताना हो बहुत से कारण हैं जो कांग्रेसी अंधभक्त जानते हुए भी राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के प्रति अंधभक्ति नहीं छोड़ रहें हैं। और वे इतने बड़े भक्त हैं कि आलू से सोना निकालने का इंतजार कर रहें साथ ही साथ चांद पर राहुल गांधी से जमीन लेकर खेती करने की। कभी कभी तो कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता भी नहीं समझ पाते की ये क्या बोल दिया महानुभाव ने क्योंकि जवाब तो वही बेचारे देते हैं। इसके बाद भी कांग्रेसी अंधभक्तो के लिए उनका भगवान सही है।

4. 60 वर्षों में इतने घोटालों के बाद भी भक्त मजबूती के साथ खड़े हैं:-

भारत मे जितने बड़े से बड़े घोटाले हुए हैं ये कांग्रेसी अंधभक्त भी जानते हैं कि कांग्रेस के सरकार के समय हुआ है यहाँ तक कि राहुल गांधी , सोनिया गाधीं खुद घोटालों में जमानत पर बाहर हैं , एक हैं कांग्रेसी अंधभक्तो के जीजाजी जो पता नहीं किस जादू से कुछ ही वर्षों में खरबपति बन गए जांच उनपे भी जारी है, खैर ये सब जानते हुए भी किसी के तलवे चाटना भक्ति नहीं अंधभक्ति होती है। आज भी भक्त राहुल को प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं साथ ही साथ 8 से 10 और घोटाला देखना चाहते हैं।

5. भक्तों द्वारा अपने राजा को 48 साल में भी युवा समझना :-

कांग्रेस भक्त कहते हैं कि राहुल गांधी युवा हैं अरे भाई 48 साल के उम्र का व्यक्ति अगर युवा होता है तो तुम्हारे हिसाब से राहुल गांधी बुड्डा होते होते 200 साल का हो जाएगा ऐसी भक्ति का पर्दा आखों पर और दिमाग पर केवल और केवल अंधभक्तो पर ही पड़ सकता है।

6. देशद्रोह की बात करने वालों के साथ खड़ा होना :-

JNU में जब देशद्रोही नारे लग रहे थे तो भक्तों के युवा राजा उनके साथ खड़े हो गए और कहने लगे कि इनकी आवाज को दबाया जा रहा है। अब ये बतावो की उसे देखकर भी राहुल गांधी की गुड़गान करना भक्ति है कि अंधभक्ति। मोदी को आज से 20 साल पहले बहुत कम लोग जानते थे राहुल गाँधी तो जन्म लेते ही भक्तों के भगवान हो गए, इस हिसाब से मोदी को समर्थन करना समझदारी है और राहुल को समर्थन करना भक्ति नहीं अंधभक्ति है।
लिखने के तो बहुत से पॉइंट हैं बहुत से तर्क हैं पर कांग्रेसी भक्तों के लिए इतना काफी है। लेख अच्छा लगा हो तो ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि और लोग सच्चाई को जान सके हो सकता है कि कुछ कांग्रेसी अंधभक्तो की आँखे खुल जाए।

अन्य लेख :-

आखिर क्यों न देखें हम ढाई महीने तक न्यूज पत्रकार महोदय

ढाई महीने के लिए चैनल देखना क्यों बन्द करें-

बहुत दिनों बाद एक ऐसी अपील देख रहा हूँ कि समझ नही आ रहा ये क्या है? मुझे तो इस अपील को देखकर हँसी आती है। हो सकता है कि आपको यह सही लगे अपने अपने विचार होते हैं। आज मैं एक पत्रकार के अपील पर कुछ अपने विचार रखूंगा आप तय कीजियेगा की उनकी यह अपील कितने हद तक सही है।


Kyu band kare news channel

● " क्या आप इन ढाई महीने के लिए चैनल देखना बंद नहीं कर सकते? कर दीजिए "

ये अपील रही महानुभाव की अब मैं किसके बारे में बता रहा हूँ आप स्वं समझदार हैं मुझे नाम लेने की जरुरत नहीं तो आइए देखते हैं उनका एक एक पॉइंट और रखते हैं अपने विचार।

1. अगर आप अपनी नागरिकता को बचाना चाहते हैं तो न्यूज़ चैनलों को देखना बंद कर दें।

महाज्ञानी पत्रकार द्वारा ये कहा गया है कि अगर आप अपनी नागरिकता को बचाना चाहते हैं तो न्यूज चैनल देखना बन्द कर दें- अब मेरी यह समझ मे नही आया कि ढाई महीने  न्यूज न देखने से मेरी नागरिकता कैसे बच जायेगी। और अगर मैं ढाई महीने न्यूज देखता हूँ तो मेरी नागरिकता कैसे खत्म हो जाएगी। हम कई सालों से न्यूज देखते आ रहे हैं हमारी नागरिकता को तो कोई खतरा नहीं हुआ आखिर ढाई महीने में ऐसा क्या होगा महानुभाव जो नागरिकता नहीं बचेगी। और ढाई महीने के बाद न्यूज देखने से नागरिकता को खतरा नहीं होगा ये मुझे कोई बता दे तो उसकी बड़ी कृपा होगी।

2. अगर आप लोकतंत्र में एक ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में भूमिका निभाना चाहते हैं तो न्यूज़ चैनलों को देखना बंद कर दें।

आज तक जो हम लोकतंत्र में जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभा रहे थें वे महान पत्रकार के कहने के अनुसार अगर हम ढाई महीने न्यूज चैनल देखते हैं तो हम जिम्मेदार नागरिक की भूमिका नहीं निभा सकते आखिर क्या ऐसा होने वाला है पत्रकार जी इन ढाई महीनों में जो हम अपनी जिम्मेदारी ही भूल जाएंगे देश के प्रति कृपया बताएं तो आपकी कृपा होगी।

3. अगर आप अपने बच्चों को सांप्रदायिकता से बचाना चाहते हैं तो न्यूज़ चैनलों को देखना बंद कर दें।

अब इसपर मैं क्या कहूँ इतने बड़े पत्रकार जब ऐसा कहते हैं तो दुःख भी होता है और उनकी घबराहट भी समझ मे आती है। अब अगर मैं ढाई महीने न्यूज न देखूँ तो हमारे बच्चे साम्प्रदायिकता से बच जायेगें और ढाई महीने के बाद देखने पर कोई दिक्कत नहीं होगी। और इतने सालों से जो हम न्यूज देखते आ रहें हैं कृपया ये बताए कि हम साम्प्रदायिक थें क्या?

4. अगर आप भारत में पत्रकारिता को बचाना चाहते हैं तो न्यूज़ चैनलों को देखना बंद कर दें। न्यूज़ चैनलों को देखना ख़ुद के पतन को देखना है। मैं आपसे अपील करता हूं कि आप कोई भी न्यूज़ चैनल न देखें। न टीवी सेट पर देखें और न ही मोबाइल पर। अपनी दिनचर्या से चैनलों को देखना हटा दीजिए। बेशक मुझे भी न देखें लेकिन न्यूज़ चैनलों को देखना बंद कीजिए।

हमारे ढाई महीने न्यूज देखने से पत्रकारिता नहीं बचेगी ये कहना है आपका उसके बाद देखने से पत्रकारिता बाख जाएगी ये कैसे? दूसरी चीज की हमारे जीवन मे बहुत से काम है हम दिनभर न्यूज नहीं देखतें 1 से 2 घण्टे का समय मिलता है न्यूज देखने को तो हमारा पतन कैसे हो जाएगा? आपने कहा कि बेशक मुझे भी न देखें तो हम आपको बता दें कि हम आपका प्राइम टाइम भी देखते हैं और कुछ न्यूज चैनलो की अच्छी चीजें भी देखते हैं 1 से 2 घण्टे में पर हमें तो कभी ऐसा नहीं लगा कि पत्रकारिता खत्म हो जाएगी। हा वो बात अलग है कि कुछ न्यूज मिर्च मसाला लगाकर दिखाया जाता है वो तो आपके भी चैनल पर होता है वो हम नहीं देखते।

5. मैं यह बात पहले से कहता रहा हूं। मैं जानता हूं कि आप इतनी आसानी से मूर्खता के इस नशे से बाहर नहीं आ सकते लेकिन एक बार फिर अपील करता हूं कि बस इन ढाई महीनों के न्यूज़ चैनलों को देखना बंद कर दीजिए।

अगर आप हमें मूर्ख समझ रहें हैं और हमे इस मूर्खता से बाहर निकालने के लिए केवल ढाई महीने न्यूज चैनल को न देखने की अपील क्यों कर रहे हैं? आपको तो ये कहना चाहिए कि आप कभी भी न्यूज न देखें और हाँ क्या मैं ढाई महीने बाद न्यूज देखूँ तो मैं मूर्खता से बाहर आकर चालाक हो जाऊँगा, अगर मैं ढाई महीने के बाद न्यूज देखने से चालाक हो जाऊँगा तो मैं ऐसा जरूर करुगा क्योंकि आपके कहने के अनुसार आजतक मैं मुर्ख था। लेकिन इसका स्पष्टीकरण भी तो चाहिए कि मैं कैसे ढाई महीनों के बाद चालाक  हो जाऊँगा।

6. पहली बार ऐसा नहीं हो रहा है। जब पाकिस्तान से तनाव नहीं होता है तब ये चैनल मंदिर को लेकर तनाव पैदा करते हैं, जब मंदिर का तनाव नहीं होता है तो ये चैनल पद्मावति फिल्म को लेकर तनाव पैदा करते हैं जब फिल्म का तनाव नहीं होता है तो ये चैनल कैराना के झूठ को लेकर हिन्दू-मुसलमान में तनाव में पैदा करते हैं। जब कुछ नहीं होता है तो ये फर्ज़ी सर्वे पर घंटों कार्यक्रम करते हैं जिनका कोई मतलब नहीं होता है।

क्या बड़ी बात कह दी आपने की पहली बार ऐसा नहीं हो रहा है कि पाकिस्तान से तनाव नही होता है, तनाव पहले भी हुए 26/11 लेकिन सरकार कुछ नहीं कर पाई , पुलवामा में इतने जवान शहीद हुए ये पहली बार थोड़ी न हुआ है लेकिन यह बताइये की हम यह मानकर चुप बैठे की यह पहली बार थोड़ी न हो रहा है जवानों को शहीद होने दें ? इसका उत्तर अगर कोई दे सके तो बड़ी कृपा होगी।

पद्दमावती कि जहां तक बात है रवीश जी हर किसी की भावना का सम्मान करना चाहिए अगर वह राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों के लोगो को नहीं अच्छा लगता है तो वे कुछ न कुछ तो विरोध प्रदर्शन करेंगे ही, जैसे SC, ST एक्ट पर प्रदर्शन किया गया दलित भाइयों द्वारा। सबको छूट है। केवल ऐसा नहीं होता कि हिन्दू-मुसलमान में चैनलों द्वारा तनाव पैदा किया जाता है , ऐसा भी देखने को मिलता है टुकड़े, टुकड़े गैंग जो भारत का अपमान करते हैं उन्हें कुछ पत्रकार और मीडिया चैनलों में हीरो दिखाया जाता है।

गलती दोनों तरफ से होती है उसके बारे में भी आप लिखते तो हमे आपके निष्पक्षता पर शक नहीं होता। खैर आपके हिसाब से ढाई महीने बाद न्यूज देखने से ऐसा कुछ नहीं होगा पर ऐसा कैसे होगा मुझे आजतक समझ मे नहीं आया?

7. क्या आप समझ पाते हैं कि यह सब क्यों हो रहा है? क्या आप पब्लिक के तौर पर इन चैनलों में पब्लिक को देख पाते हैं? इन चैनलों ने आप पब्लिक को हटा दिया है। कुचल दिया है। पब्लिक के सवाल नहीं हैं। चैनलों के सवाल पब्लिक के सवाल बनाए जा रहे हैं। यह इतनी भी बारीक बात नहीं है कि आप समझ नहीं सकते। लोग परेशान हैं। वे चैनल-चैनल घूम कर लौट जाते हैं मगर उनकी जगह नहीं होती। नौजावनों के तमाम सवालों के लिए जगह नहीं होती मगर चैनल अपना सवाल पकड़ा कर उन्हें मूर्ख बना रहे हैं। चैनलों को ये सवाल कहां से आते हैं, आपको पता होना चाहिए। ये अब जब भी करते हैं, जो कुछ भी करते हैं, उसी तनाव के लिए करते हैं जो एक नेता के लिए रास्ता बनाता है। जिनका नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है।

क्या सरकार से यह पूछना की आपके रोजगार देने के वादे का क्या हुआ? आपके पाकिस्तान को उसी भाषा मे जवाब देने के वादे का क्या हुआ? स्मार्ट सिटी के वादे का क्या हुआ? बुलेट ट्रेन के वादे का क्या हुआ? सड़क , बिजली , पानी आदि मुद्दों का क्या हुआ यह जनता का सवाल नहीं है तो किसका सवाल है? ये लगभग सभी न्यूज चैनल पूछते हैं और BJP के प्रवक्ता जवाब भी देते हैं आपको इससे घबराहट क्यों हो रही है।

पत्रकार महोदय आपको इस बात पर दुःख व्यक्त करना चाहिए कि राजनीति में ऐसे लोग हैं जो सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर बाहर हैं, किसी का पूरा खानदान देश प्रदेश को अपनी जागीर समझ कर हर सदस्य को पार्टी में ले लिया है, कुछ लोग अपने को दलितों की देवी समझ कर दलितों का सबसे बड़ा हितैसी समझकर खुद करोड़ो के महलों में बैठे हैं, और दलितों के लिए कुछ नहीं किये और हर चुनाव में उन्हें दलितों की याद आती है। 

किसी राज्य में दूसरे नेता की रैली नहीं होने देना और हेलीकॉप्टर नहीं उतरने देने वाले लोकतंत्र बचाने की बात करते हैं। कोई सत्ता में भ्रष्टाचार खत्म करने की बाद करके हाल फिलहाल राजनीति में आया और खुद की इज्जत बचाने के लिए भ्रष्टाचारियों के साथ मंच साझा कर रहा है। हम वे भी देखते हैं कि क्या हो रहा है हम पागल नहीं है कि किसी न्यूज चैनल पर आँख बंद करके विश्वास कर ले चाहें वह आपका न्यूज चैनल हो या किसी और का।

आपका कहना कि ये मोदी के लिए रास्ता बनाते हैं अगर ऐसे ही रास्ता बनाने से रास्ता बन जाये तो लोग बस न्यूज चैनल को देखकर वोट न दे दें किसी को रैली करने की क्या जरूरत, किसी को गरीबों के बैंक खाते खुलवाने की क्या जरूरत, किसी को पाकिस्तान को उसी भाषा मे जवाब देने की क्या जरूरत, किसी को शौचालय और गरीबों के लिए घर बनवाने की क्या जरूरत, किसी को किसानों को खाद बीज के लिए पैसे देने की क्या जरूरत, गरीबो के लिए आयुष्मान योजना जिससे उनका इलाज हो सके इसकी क्या जरूरत, हर गांव में बिजली पहुचाने की क्या जरुरत, पिछली सरकारों से ज्यादा तेजी से सड़के बनवाने, रेल पटरी बिछवाने की क्या जरूरत, मुद्रा योजना के तहत लोगो को पैसे देने की क्या जरूरत जिससे लोग अपने व्यवसाय को बढ़ा सकें, गरीबो को आरक्षण देने क्या जरूरत, तीन तलाक से पीड़ित महिलाओं के लिए लड़ने की क्या जरूरत, अगर ये सब चीजें सरकार बेकार ही कर रही है हम तो ढाई महीने केवल न्यूज देखकर ही मोदी को वोट कर देगें ये आपकी सोच गलत है। 

हम देख रहें कि क्या क्या हो रहा है और पहले क्या क्या हो रहा था ऐसा नहीं कि न्यूज को देखकर किसी को वोट दे दें। हम उन्हें भी देखते हैं जो दलितों के हितैसी बनते हैं और महलों में रहते हैं हम उन्हें भी देखते हैं जिनका पूरा खानदान देश प्रदेश को अपनी जागीर समझता है, हम उन्हें भी देखते हैं जो लोकतंत्र बचाने की बात करते हैं और खुद किसी विशेष पार्टी की रैली नहीं होने देते, हम टुकड़े टुकड़े गैंग को भी देखते हैं और उनको समर्थन करने वाले राजनेता और पत्रकार को भी, हम उन्हें भी देखते हैं जिन्होंने करोड़ो टैक्स नहीं भरा है और जमानत पर बाहर हैं, हम उन्हें भी देखते हैं जो भ्रष्टाचार मिटाने की बात करके आएं और खुद भ्रष्टाचारियों से मिल गए। 

हम सब देखते हैं और तब तय करते हैं कि किसे वोट दे किसे नहीं केवल ढाई महीने न्यूज देखकर हम वोट नहीं कर देतें।

8. मैं भाजपा समर्थकों से भी अपील करता हूं कि आप इन चैनलों को न देखें। आप भारत के लोकतंत्र की बर्बादी में शामिल न हों। क्या आप इन बेहूदा चैनलों के बग़ैर नरेंद्र मोदी का समर्थन नहीं कर सकते? क्या यह ज़रूरी है कि नरेंद्र मोदी का समर्थन करने के लिए पत्रकारिता के पतन का भी समर्थन किया जाए? फिर आप एक ईमानदार राजनीतिक समर्थक नहीं हैं। क्या श्रेष्ठ पत्रकारिता के मानकों के साथ नरेंद्र मोदी का समर्थन करना असंभव हो चुका है? भाजपा समर्थकों, आपने भाजपा को चुना था, इन चैनलों को नहीं। मीडिया का पतन राजनीति का भी पतन है। एक अच्छे समर्थक का भी पतन है।

वाह! क्या अपील है कि भाजपा के समर्थक इन न्यूज चैनल को न देखें तो वे क्या उस न्यूज चैनल को देखें जो टुकड़े टुकड़े गैंग का समर्थन करते हैं, नक्सलियों का समर्थन करते हैं , उनको सरकार द्वारा किया हुआ एक काम भी अच्छा नहीं लगता क्या उन्हें देखें कृपया जरूर बताएं? 

लोकतंत्र की बर्बादी ये कुछ पत्रकार अपने आप को क्या समझते हैं कि लोकतंत्र यही बनाएं हुए हैं दूसरे चैनल वाले तो लोकतंत्र खत्म कर रहे हैं अरे मेरे भाई देश ने आपातकाल का समय भी देखा है उसके बाद भी लोकतंत्र खत्म नहीं हुआ तो आपके कहने से ढाई महीने में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। 

और जहाँ तक बाद मोदी के समर्थन की है तो लोग उस समय भी मोदी का समर्थन करते थे जब गोधरा कांड हुआ और सारे मीडिया वाले मोदी को दिन रात हत्यारा बनाने की कोशिश में जुटे थे। आज की बात तो कुछ और है मोदी समर्थक न्यूज देखकर समर्थन नहीं करते वे तब से समर्थन करते हैं जब मीडिया और सरकार उनको गलत साबित करने में लगी थी अगर न्यूज देखकर ही समर्थन करना होता तो लोग मोदी से नफरत करतें समर्थन नहीं क्योंकि गोधरा के बाद कुछ ऐसा ही मीडिया में चला था।

9. प्रधानमंत्री मोदी पत्रकारिता के इस पतन के अभिभावक हैं। संरक्षक हैं। उनकी भक्ति में चैनलों ने ख़ुद को भांड बना दिया है। वे पहले भी भांड थे मगर अब वे आपको भांड बना रहे हैं। आपका भांड बन जाना लोकतंत्र का मिट जाना होगा।

जलन तो किसी आदमी से होना स्वाभाविक है पर जब इतना जलन हो तो स्वास्थ्य खराब हो जाता है प्रिय पत्रकार महोदय, आपातकाल मे पत्रकारिता का पतन नहीं हुआ था क्या? इसपर भी दो शब्द लिख देतें। जब मीडिया मोदी के पीछे पड़ी थी कि उनको दिन रात गलत साबित करने में लगी थी तो उस समय पत्रकारिता का अभिभावक कौन था इसके बारे में कोई बताए तो अच्छा होगा, एक आदमी से इतनी नफऱत मुझे समझ मे नहीं आती की आप अपने आप को सही समझे और पूरी दुनिया गलत पूरे न्यूज चैनल गलत केवल आप सही ये तो केजरीवाल वाला हाल है, जो अपने आप को ईमानदार समझते हैं बाकी पूरा भारत बेईमान हालाकिं आजकल सत्ता के लालच में उनको भी भाजपा के अलावा सारी पार्टियां ईमानदार नजर आ रहीं हैं।

मैं आपके ढाई महीने के अपील के बारे में बहुत कुछ लिख सकता था आपके सारे कथन का जवाब दे सकता था लेकिन समझदार के लिए इतना काफी है, और आपने जो भक्त शब्द का प्रयोग किया है मेरा अगला लेख उसी के ऊपर होगा कि असल में भक्त कौन है, भाजपा या कांग्रेस समर्थक जो तथ्यों के साथ और तर्क पर आधारित होगा। आपलोगो से एक अपील है कि अगर यह लेख आपको अच्छा लगा हो तो कृपया इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि और लोग ढाई महीने के अपील के बारे में पत्रकार महोदय के घबराहट के बारे में समझ सकें|

लेखक - राजेन्द्र गौतम

अन्य लेख :--

मोदी का विरोध और सेना से सबूत मांगने पर लेख

मोदी के विरोध में कहीं आप सैनिकों का अपमान तो नहीं कर रहें!


कई दिनों से मैं फेसबुक , Twitter , News चैनल्स , और कई सोशल मीडिया साइट्स पर देख रहा हूँ एयर स्ट्राइक का सबूत मागा जा रहा है। इसी को लेकर मैं आपको यहाँ पर केवल 2 पॉइन्ट बता रहा हूँ और आप तय कीजिये कि आप मोदी के विरोध में इतना पागल हो गए हैं कि आप जाने अनजाने में देश और सेना पर शक कर रहे हैं।


Indian Air Strike on Pakistan

1. अगर स्ट्राइक मोदी ने नहीं सेना ने किया है तो फिर सबूत क्यों?

2. विंग कमांडर अभिनन्दन के लिए पाकिस्तान और इमरान का धन्यवाद क्यों?

अगर स्ट्राइक मोदी ने नहीं सेना ने किया है तो फिर सबूत क्यों?

कुछ लोग ये कह रहे हैं कि मोदी ने क्या किया एयर स्ट्राइक में , जो किया सेना ने किया हा मैं भी मानता हूँ कि जो भी किया सेना ने किया लेकिन साथ मे यह भी मानता हूँ इसका फैसला मोदी ने लिया। जो लोग ये कहते हैं कि मोदी का इससे क्या लेना देना तो फिर वे मोदी से सबूत क्यो मांग रहे हैं। 

1. जब एयर स्ट्राइक होती है तो सेना ने किया।

2. जब सबूत मांगना हो तो मोदी सबूत दें।

3. जब हमारे महान विंग कमांडर अभिनन्दन पाकिस्तान सेना द्वारा पकड़े जाते हैं तो मोदी की गलती।

4. जब विंग कमांडर छोड़े जाते हैं तो इमरान खान सही।

5. जब मिराज 2000 से एयर स्ट्राइक होता है तो  इंद्रा गांधी ने खरीदा था उसी से हो पाया।

6. ये नहीं देखते की इतने पुराने फाइटर प्लेन से सेना ने जज्बा दिखाया।

7. मिग 21 से जब F-16 गिराया महान अभिनन्दन ने तो यह कांग्रेस के समय खरीदी गई थी।

8. ये नहीं देखा गया कि उसे भारतीय सेना फाइटर प्लेन के आभाव में यूज़ कर रही है।

हम मोदी के विरोध में इतना पागल हो गए हैं कि हम मोदी से नहीं सेना से सबूत मांग रहें है। दूसरी बात हमारी, तुम्हारी, या किसी न्यूज चैनल या किसी पार्टी की क्या औकात जो सेना से सबूत मांगे। 

अगर यह स्ट्राइक मोदी ने नहीं किया सेना ने किया है अगर इसमें मोदी का कोई हाथ नहीं, कोई फैसला नहीं, तो आप किससे सबूत मांग रहे हैं मोदी से या सेना से? जरूर सोचिए।

जब इंद्रा ग़ांधी के समय भारत पाकिस्तान युध्द हुआ तो हम ये कहते हैं कि इंद्रा ग़ांधी कठोर फैसले लेती थीं, अटल विहारी वाजपेयी जी ने इंद्रा गांधी की बड़ाई भी की थी। लेकिन अटल जी और हम आजतक गलत थें भारत पाकिस्तान युध्द का श्रेय हम इंद्रा गांधी को कैसे दे सकते हैं , इसमें इंद्रा गांधी से क्या लेना देना जो किया सेना ने किया था इंद्रा ने कुछ नहीं किया जैसा कि एयर स्ट्राइक सेना ने किया मोदी ने नहीं मोदी का कोई फैसला नहीं था।

अब कांग्रेस के समर्थकों को यह नहीं कहना चाहिए कि भारत पाकिस्तान युध्द में भारत की विजय का श्रेय इंद्रा गांधी और कांग्रेस को जाता है, जब इंद्रा गांघी ने कुछ किया ही नहीं तो श्रेय किस बात का।

और साथ ही कारगिल युध्द में भारत की विजय का श्रेय अटल विहारी वाजपेयी और भारतीय जनता पार्टी  को नहीं जाना चाहिए क्योंकि वो भी तो सेना ने ही किया था।

कांग्रेस ने कहा कि मिराज 2000, मिग 21 कांग्रेस ने खरीदा,यह कहते हुए शर्म नही आती की इतने पुराने फाइटर प्लेन से हमारे जवान लड़ रहे हैं। जबकि कितने देश मिराज 2000 , मिग 21, और जगुआर जैसे प्लेन को अपने एयर फोर्स से रिटायर कर चुके हैं।

थोड़ी सी शर्म बची हो तो कृपया ऐसी बाते न करें इससे अपनी ही बेइज्जती होती है।

इससे यही बात पता चलती है कि भारत पाकिस्तान युध्द में न ही इंद्रा गांधी का कोई फैसला था न ही अटल विहारी वाजपेयी का, और सर्जिकल स्ट्राइक, और एयर स्ट्राइक में मोदी का कोई फैसला नही था।

विंग कमांडर अभिनन्दन के लिए पाकिस्तान और इमरान का धन्यवाद क्यों?


मुझे कुछ न्यूज चैनल देखकर हँसी भी आ रही है और दुःख भी हो रहा है कि , विंग कमांडर अभिनन्दन के लिए पाकिस्तान को बधाई दिया जाए आखिर क्यों? यह तो पाकिस्तान को करना ही था चाहे उसे युध्द में अपने हारने डर हो या भारत सरकार और अन्तर्राष्ट्रीय दबाव या फिर जेनेवा संधि के तहत उसे हमारे महान विंग कमांडर अभिनन्दन को छोड़ना ही था।

हम पाकिस्तान और इमरान खान को किसलिए धन्यवाद करें जो 3 दशक से वो भारत मे आतंकवाद फैला रहा है उसके लिए, या फहिर 26/11 के लिए, या उरी के लिए , या फिर पुलवामा में शहीद हुए हमारे सैनिकों के लिए, या हर रोज भारतीय सीमा पर उसके द्वारा रोज गोलियां चलाने के लिए, या भारत मे आतंकवादी भेजने के लिए, या सिमा पर शहीद हो रहे हमारे जवानों के लिए, आपको पता है कि जब वह विंग कमांडर को भारत को सौंपे उस दिन भी वे सिमा पर गोलियां चला रहे थे। और आज भी चला रहे हैं तो इसके लिए धन्यवाद करूँ मैं इमरान खान का। 

आपको शर्म नहीं आती ऐसी बाते करते हुए की इमरान खान का धन्यवाद करना चाहिए, वैसे आपकी कोई गलती नहीं आपके साथ इमरान खान का धन्यवाद करने वाले बहुत से लोग हैं जो आतंकी मसूद अजहर को आतंकी नही मानतें और ये कहते हैं आजादी चाहिए और टुकड़े होगें।

वैसे मैने इसमें किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया हैं दो तीन राजनेताओं को छोड़कर बाकी आपलोग खुद समझदार हैं कि यह लेख किसके बारे में और क्यों लिखा गया है आगर जानकारी अच्छी लगी हो तो शेयर जरूर करें ताकि हर भारतीयों को यह पता चले कि क्या हो रहा है हमारे देश में क्योंकि सच कड़वा होता है।

लेखक :- अभिनव कुमार